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सतीश ने दर्द को भुलाकर जीता स्वर्ण पदक

विजेता भारोत्तोलक सतीश शिवालिंगम (77 किग्रा) ने जांघ मे दर्द के बावजूद राष्ट्रमंडल खेलो मे भारत को तीसरा स्वर्ण पदक दिलाया। सतीश ने कुल 317 किग्रा भार उठाया तथा वह अपने प्रतिद्वंद्वियो से इतने आगे हो गए कि क्लीन एवं जर्क मे अपने आखिरी प्रयास के लिए नही गए। उन्होने कहा कि मुझे खुशी है कि मैं स्वर्ण पदक जीतने मे सफल रहा।

सतीश ने कहा कि मेरी जांघ में इतना दर्द हो रहा था कि मेरे लिए बैठना भी मुश्किल था। सभी मेरा ध्यान रख रहे थे, जिससे मेरी उम्मीद बंधी। लेकिन, मैं पूरी तरह से आश्वस्त नहीं था। मैंने कड़ा अभ्यास नही किया था और मेरा शरीर अपनी सर्वश्रेष्ठ स्थिति मे नही था, इसलिए मैं स्वर्ण पदक की उम्मीद कैसे कर सकता था पर मैने स्वर्ण पदक जीता।

फाइनल मे सतीश और इंग्लैंड के रजत पदक विजेता जैक ओलिवर के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। इन दोनो ने अपने अगले प्रयास मे ज्यादा वजन उठाया। ओलिवर आखिर में स्नैच मे आगे रहने मे सफल रहे, क्योंकि उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में 145 किग्रा भार उठाया था। आखिर मे हालांकि सतीश क्लीन एवं जर्क में बेहतर प्रदर्शन करके अपना खिताब बचाने मे सफल रहे।

सतीश ने कहा कि किस्मत मेरे साथ थी अगर ओलिवर उन दो प्रयास मे नाकाम नही रहता, तो फिर मुझे उससे अधिक भार उठाना पड़ता और मैं पक्के तौर पर नही कह सकता कि मेरा शरीर उसकी इजाजत देता या नही। पर मै अब काफी राहत महसूस कर रहा हूं।

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