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भारत बंद सफल बनाने को बसपा ने झोंकी पूरी ताकत

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुसूचित जाति जन जाति अत्याचार निवारण अधिनियम के दुरूपयोग को रोकने के लिये तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आदेश पारित करने के विरोध में सोमवार को अनुसूचित जाति जनजाति के विभिन्न संगठनों ने प्रस्ताबित भारत बंद के तहत मुख्यालय में जुलूश निकाल अपना विरोध व्यक्त किया। बंद को सफल बनाने में बसपा नेताओं व पदाधिकारियों ने पूरी ताकत झोंक दी वावजूद इसके जिले में यह पूरी तरह बेअसर रहा। अलबत्ता आन्दोलन कारियों ने जुलूश निकाल सरकार को चेताने के साथ ही अपर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्टपति को सम्बोधित ज्ञापन भेजा। जिसमें सरकार को इसका गम्भीर परिणराम भुगतने को तैयार रहने की हिदायत दी गई है। 

आन्दोलनकारी एससीएसटी एक्ट को अपना अधिकार बताते हुये इसमें संसोधन के किसी भी प्रयास को संविधान में छेडछाड करार दे सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को दलित हितो पर कुठाराघात बता रहे थे। भारत बंद के प्रस्ताबित आन्दोलन के क्रम में सोमवार की सुबह करीब दस बजे सैकडों आरक्षक समर्थक अम्वेडकर पार्क में एकत्र हो गये। जुलूश की सक्ल में आरक्षण व दलित उत्पीडन अधिनियम के प्रावधानों के समर्थन में तरह तरह के नारे लगाते हुये यह हुजूम कलेक्टेट पहुंचा।

जहां अपर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्टपति को सम्बोधित ज्ञापन भेजा गया। इसके पूर्व अम्वेडकर पार्क में हुई जन सभा में बसपा के जिलाध्यक्ष ने कहा कि आरक्षण हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है जो बाबा साहब ने सदियों से बंचित वर्ग को दिया है। दलित उत्पीडन अधिनियम के प्रावधानों में ढिलाई किये जाने से उन पर अत्याचार और बढने की सम्भावनायेें प्रवल होगी। ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय का आदेश दलित हितो पर कठोराघात है।

आयोजन में बसपा के जोन कोडिनेटर अशोक कुमार वर्मा, गंगादीन अहिरवार, रामपाल, संतोष वर्मा, मोतीलाल वर्मा, जिला प्रभारी रियाज राईन, छत्रपाल सिंह यादव, राजेश सिद्धार्थ, अखिल भारती कोरी समाज के जिलाध्यक्ष जेपी अनुरागी सहित भारी संख्या में विभिन्न जातीय व बसपा के अनुशांगिक संगठनों के नेताओं ने अपने विचार व्यक्त किये। सभी ने केन्द्र सरकार से मांग की कि अध्यादेश के जरिये सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को बेअसर करने के लिये आगे आये। ताकि सदियों से वंचित वर्ग के हितों की सुरक्षा हो सके। 
 

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