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करीबी लोग बच्चों को बनाते है हवस का शिकारः एसपी

मासूम बच्चियों से दुष्कर्म करने वाले अधिकांष लोग नजदीकी रिष्तेदार होते हैं। जिनका सम्मान बचाने के लिए बच्चियों की आवाज दबा दी जाती है। यदि पीड़िता या पीड़िता के परिजन बेखौफ होकर अपनी आवाज उठायें तो समाज में खुला घूम रहे बलात्कारियों को सजा मिलेगी और इससे समाज में भय भी पैदा होगा। यह बात कल देर शाम पुलिस अधीक्षक शालिनी ने अन्र्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर बुन्देलखण्ड विकास सोसाइटी के तत्वाधान में आयोजित एक परिचर्चा ‘नारी संवाद’ में भाग लेते हुए कही। इस परिचर्चा का संचालन बुन्देलखण्ड विकास सोसाइटी के सचिव सचिन चतुर्वेदी एवं सलाहकार अरूण निगम ने किया।

पुलिस अधीक्षक शालिनी ने कहा कि जब मैंने बाँदा एसपी का कार्यभार संभाला, उसी दिन मेरे संज्ञान में एक पांच साल की मासूम बच्ची से रेप का मामला सामने आया था। लेकिन पीड़ित के परिजन मुकद्मा इस वजह से नहीं लिखवा रहे थे, क्योंकि बलात्कारी उनका अपना ही नजदीकी रिष्तेदार था। बाद में मैंने एसओ प्रतिमा सिंह को लगाया ताकि उन्हें मुकदमा लिखाने को राजी करें और उस परिवार को भी मनाना पड़ा तब जाकर मुकदमा दर्ज हुआ और आरोपी जेल भेजा गया। इसी तरह दूसरा मामला मटौंध क्षेत्र का है जहां एक षिक्षक अपनी षिष्या को हवस का षिकार बनाता रहा। असलियत सामने आने के बाद अध्यापक का सम्मान बचाने के लिए पीड़िता और उसके परिजन आवाज नहीं उठाना चाहते थे।

एसपी ने कहा कि आज चाचा, भतीजा, मामा, फूफा, सौतेला भाई आदि तमाम रिष्ते ऐसे हैं, जो बच्चियों को हवस का षिकार बनाते हैं, जिससे रिष्ते तार-तार हो जाते है। ऐसा नहीं है कि सभी रिश्ते ऐसे होते हैं, पर जो ऐसा करते हैं, ऐसे लोगों को सजा दिलाने के लिए अपनी आवाज उठानी होगी। तभी समाज में दूसरे लोग भी भयभीत होंगे।

परिचर्चा में भाग लेते हुए अवनि परिधि अस्पताल की डाॅ. संगीता सिंह ने कहा कि महिला स्वास्थ्य के प्रति अभी भी महिलाओं में जागरूकता नहीं आई। पुत्र के मोह में अभी भी चोरी छिपे लिंग परीक्षण के मामले प्रकाष में आते रहते हैं। उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालय में मेडिकल काॅलेज खुल गया है, लेकिन सुविधाएं न होने से अभी भी मरीजों को बाहर जाना पड़ता है। महिलाओं के मामले में भी स्वास्थ्य सुविधाएं नगण्य हैं। आर्य कन्या इंटर काॅलेज की प्रबन्धक श्रीमती शमीम बानो कहती हैं कि बिना षिक्षा के व्यक्ति का विकास नहीं हो सकता। बच्चों का मन कोमल होता है षिक्षक जिस तरह से भी उन्हें ढालता है बच्चे उसी तरह से ढलते हैं। उन्होंने कहा कि षिक्षा के बल नौकरी के लिए नहीं? बल्कि इससे बौद्धिक विकास होता है। महिलाएं हर क्षेत्र में षिक्षा के कारण ही आगे बढ़ रही हैं।

इसी तरह बाँदा में शान्ति नीर का उद्योग लगाने वाली पहली महिला उद्यमी मंदाकिनी गुप्ता ने कहा कि हर घर में महिला पुरूष के बीच भेद होता है। हर मामले में पुरूष को इसलिए महत्व दिया जाता है कि वह उत्राधिकारी होता है। लेकिन अब महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। मैंने भी जब उद्योग लगाना चाहा तो किसी को विष्वास नहीं हुआ परन्तु मेरे परिवार ने हर संभव मदद की। फैमली के सहयोग के कारण ही मैं इस मुकाम तक पहुंच पाई।

परिचर्चा के भाग ले रहे अधिवक्ता संघ बाँदा के अध्यक्ष अषोक त्रिपाठी जीतू ने कहा कि जब मैंने 36 साल पहले वकालत शुरू की थी तब सिर्फ एक महिला वकील थी। अब यह संख्या बढ़ रही है। मैने कार्यभार ग्रहण करने के बाद महिलाओं को एक कक्ष भी आवंटित किया है ताकि वह भी पुरूषों की भाति सम्मान पूर्वक वकालत कर सकें।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए सोसाइटी के सचिव सचिन चतुर्वेदी ने इस पूरे संवाद का निष्कर्ष निकालते हुए बताया कि प्रत्येक नारी द्वारा आपसी संवाद ही उन्हें उत्पीड़न से बचा सकता है। अरूण निगम ने कहा कि प्रत्येक नारी को आत्म सम्मान से जीने का हक है और हम सभी का कर्तव्य है कि उनके इस हक को छीना न जा सके। इस अवसर पर बुन्देलखण्ड विकास सोसाइटी के द्वारा सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में संजय निगम अकेला, होटल गुरूदेव पैलेस के पंकज गुप्ता, बाँदा अर्बन बैंक के एमडी दिनेष दीक्षित, अरूणेष सिंह, आफताब खान, प्रसून श्रीवास्तव, निखिल सक्सेना, अनिल सिंह आवारा, सत्यजीत तिवारी, आकाश कुमार, पुष्पेन्द्र शुक्ला, ब्रजेष द्विवेदी, सुषील तिवारी आदि उपस्थित रहे।

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