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किसकी मजाल यदि सास चाह ले तो बेटी का जन्म ना हो : नरेन्द्र मोदी

राजस्थान के झुंझनू में पीएम नरेन्द्र मोदी ने पुनः अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को गर्वीली ध्वनि से तेज धार प्रदान की। पीएम मोदी की असल खासियत यही है कि अवसर को भुनाना बखूबी जानते हैं। जहाँ एक ओर सोशल मीडिया से लेकर तमाम संस्थाओं में महिला दिवस मनाया जा रहा, वहीं नरेन्द्र मोदी ने झुंझनू ग्राम पहुंचकर लिंगानुपात और कुपोषण पर अपनी राय व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि बेटी के जन्म की जिम्मेदारी सास को लेनी होगी और सास ने यह जिम्मेदारी ली तो किसी की मजाल नहीं कि बेटी का जन्म ना हो सके। शायद पीएम परिवार में सास की ताकत को समझ चुके हैं। सास भी एक औरत होती है लेकिन किरदार के साथ जिम्मेदारी व चरित्र चित्रण बदल जाया करता है।

गौरतलब है कि राजस्थान के झुझनू ग्राम में लिंगानुपात का सबसे खराब स्तर था। एक हजार में सात सौ कुछ बेटियां थीं। लेकिन पीएम की अपील उपरांत कुछ ही वर्ष में लिंगानुपात में रिकार्ड सुधार की वृद्धि दर्ज हुई। अब एक हजार में आठ सौ पचपन का औसत दर्ज हुआ। यह रिकार्ड सुधार वृद्धि है। जिससे प्रोत्साहन का हकदार यह गांव पीएम के वक्तव्यों से अभिभूत हुआ।

महिला दिवस पर फेसबुक, ट्विटर के वाल भी विभिन्न विषयों के साथ महिलाओं हेतु बधाई संदेश से पटी पड़ी हैं। इस दिन महिलाओं में गर्व का भाव देखकर सार्थकता सिद्ध होती महसूस होती है।

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