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45वें राष्ट्रीय रामायण मेले का जगदगुरु ने किया शुभारंभ

भगवान श्रीराम की तपोस्थली चित्रकूट मे 45वें राष्ट्रीय रामायण मेला महोत्सव का उद्घाटन पद्म विभूषण तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामभद्राचार्य महाराज ने करते हुए रामायण मेले के आयोजकों से कहा कि राष्ट्रीय रामायण मेले को अगले वर्ष से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का रामायण मेला बनाने के लिए जो भी व्यय होगा वह स्वयं वहन करेंगे।

मेले का शुभारम्भ करते हुए जगद्गुरू रामभ्रदाचार्य ने कहा कि रामायण के विस्तार के संबंध में अभी बहुत कुछ करना शेष है। जिसे पूर्ण करने की सलाह दी। रामायण के बारे में लोगों को बोधमय होने पर तुलसी की आत्मा को शान्ति मिलेगी। ऐसे महाकाव्य को श्रद्धा से पढकर जीवन में उतारने से मानव का कल्याण होगा। रामचरित मानस में नौ रसों की प्रधानता है, लेकिन तीन रस प्रमुख है। जिसमें भक्ति रस प्रमुख है। उद्घाटन सभा की अध्यक्षता कर रहे अखिलेश्वरानन्द महाराज अध्यक्ष गौ संवर्धन मध्यप्रदेश ने कहा कि रामायण को प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में उतारना चाहिए। रामचरित मानस जीवन की आचार संहिता है। इस पर चलने से व्यक्ति का लोक और परलोक दोनो सध जाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को रामचरित मानस का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने कार्यक्रम सराहना करते हुए कहा कि रामचरित मानस को कालजयी साहित्य बताया कहा कि दुनिया की अनेक भाषाओं में रामायण अनुवाद हो चुका है इसे चरित्र सुधार ग्रन्थ के रूप में माना जाता है मानस की चैपाई के आधार पर कहा कि ‘‘रामकथा कलि कलुष विभंजन’’ रामचरित मानस संदेशों को जीवन में उतारने से कल्याण हो सकता है। रामनाम महिमा के संबंध में कहा कि राम विश्व के सर्वोच्च सत्ता स्वरूप हैं। इसी क्रम में ही रामकथा के विद्वानों ने प्रकाश डाले।

अखाडों के निशानों के साथ निकाली शोभा यात्रा
परिक्षेत्र के दर्जनों संतों-महंतों द्वारा अपने-अपने आश्रमों के निशानों के साथ बैण्डबाजों एवं हाथी-घोड़ों सहित श्री जयेन्द्र सरस्वती वेद पाठशाला के छात्रों द्वारा वेद मंत्रों को रिचायों सहित उच्चारण करते हुए जुलूस की शक्ल में मेला प्रांगण पहुॅचे। मेले के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश करवरिया ने गजानन की पूजा करने के पश्चात साधू-संतो ंके निसानों की अर्चना की। उद्घाटन मुख्य अतिथि जगदगु्रु रामभद्राचार्य द्वारा दीप प्रज्जवलन किया गया। मंचाशीन लोगों को माल्यार्पण बाॅदा-चित्रकूट के सांसद भैरों प्रसाद मिश्र, राजेश करवरिया व करूणा शंकर द्विवेदी ने किया। मंगलाचरण जगद्गुरू रामभद्राचार्य विवि के छात्रों ने किया। रामायण मेले का विषय प्रवर्तन डा करूणा शंकर द्विवेदी प्रचार मंत्री ने किया। उन्होंने बताया कि रामायण मेला रसबोध को प्रचारित करने का एक प्रमुख उदाहरण है। राष्ट्रीय एकता के लिये समाज में रामायण का महत्व सर्वोपरि है। व्याख्यान तिरूपति के प्रकांड विद्वान आरएस त्रिपाठी ने किया।

रामायण मानव समाज का जीवन संविधान: विश्वबन्धु
चित्रकूट। उद्घाटन सत्र के पश्चात प्रख्यात विद्वानों में इलाहाबाद से पधारे डा सीताराम सिंह विश्वबन्धु ने कहा कि राष्ट्रीय रामायण मेला से प्रेरणा लेकर सिंहबेरपुर खेरिया जनपद बाॅदा तथा माघ मेला प्रांगण में भी प्रतिवर्ष रामायण मेला प्रारम्भ होने लगा है। आज रामचरित मानस सम्मेलनों की सर्वाधित आवश्यकता है। उन्होने कहा कि समाज में नैतिक पतन रोकने के लिए रामचरित मानस ग्रन्थ से बढकर दूसरा कोई उपाय नहीं है। रामायण मानव समाज का जीवन संविधान है। मानव किस तरह अपना जीवन जिये तथा दूसरे को भी जीने दे का सिद्धान्त रामायण से ही पता चलता है। चित्रकूट के कामदनाथ प्रमुख द्वार के संत मदन गोपाल महाराज ने रामचरित मानस के संदेश को अपने जीवन में उतारने का आवाहन किया। समाज में शान्ति की स्थापना बिना मानस के संदेशों को अपनाये बगैर सम्भव नहीं है। इलाहाबाद के विद्वान डा सभापति मिश्र ने वर्तमान अन्तर्राष्ट्रीय अव्यस्था पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आतंक और भ्रष्टाचार का समापन तभी संभव है जब घर-घर रामचरित मानस का पाठ हो और जीवन में उसका अनुसरण किया जाए। सिलीगुढ़ी कलकत्ता के महाकवि मोहन दुकुन ने कहा कि राम ही सत्य है राम सत्य युग में थे त्रेता और द्वापर में थे कलियुग में अभी भी है। हरियुग भारत व विश्व कें मानव जगत को जागरण के लिए विद्यमान रहेंगे। कहा कि राम केवल अध्यातमिक सांस्कृतिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण से अध्ययन व शोध करने से ही उनका अस्तित्व शीलता को प्रस्तुति मिलेगा। साहित्य साधिका डा सरोज गुप्ता जयपुर ने कहा कि लोहिया ने राष्ट्र को एक सूत्र में बाधने के रामचरित मानस का सहारा लिया था। जिसके नायक श्रीराम है राम की करनी ने सांस्कृतिक एकता में बाधा है। यही कारण है कि राजा राम आज भी जनता के मध्य सजीव हैं। उन्होंने कहा कि विनोवा जी ने कहा था कि तुलसी अकबर के समकालीन थे। आम जनमानस अकबर को तो भूल गये मगर तुलसी के राजा राम आज भी जनमानस के हृदय में विराजमान है। संचालन डा डाॅ चन्दिका प्रसाद दीक्षित ललित ने किया। रामकथा मर्मज्ञों में संत कुमार मिश्र रामयणी ने रामचरित मानस को मानव जीवन के सुधार का महामंत्र बताया। संचालन करते हुये प्रयाग के डाॅ सीताराम विश्वबन्धु ने कहा कि आज परिवार में अलगाव व विद्वेष की भावना फैली हुयी उसे मानसे के मंत्रों को जीवन में उतार कर समाप्त किया जा सकता है। डाॅ तीरथदीन पटेल ने माता कैकेई के क्रियाकलाप को लोकगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया।ं छत्तीसगढ़ से पधारे ललित ठाकुर ने भजनों के माध्यम से वातावरण राममय बना दिया।

रासलीला, भजन व विद्वत गोष्ठी का हजारों दर्शकों ने उठाया लुत्फ
द्वितीय सत्र में विद्वत गोष्ठी की अध्यक्षता तिरूपति के डाॅ आरएस त्रिपाठी ने की। आगरा की साहित्य पदमश्री डाॅ सरोज गुप्ता का विचार रहा कि नारी शिरोमणि सीता का चारित्रिक बल उसका तपोव्रती जीवन है। उसी के बल पर वह रावण जैसे प्रतापी राजा को दुत्कारती है, तप जीवन का सम्बल बन जाये तो सफलता निश्चित है। लक्ष्य की पूर्ति में तप, त्याग, तितिक्षा जरूरी है। नारी में यदि इन गुणों का समावेश पुरूष द्वारा हो जाये तो फलश्रुति उत्तम होगी। राम एक पत्नीव्रत हैं इसीलिये सीता भी पर पुरूष  रावण की ओर नजर उठाकर भी नहीं देखतीं। तिनके को माध्यम बनाकर उसे धित्कारती है-‘सठ सूने हरि आनहि मोही, अधम निलज्ज लाज नहीं तोही’ यह ‘सत्य’ की ‘सत्ता’ को ललकार है। आज इसी भाव की महती आवश्यकता है। प्रयाग के डाॅ सभापति मिश्र ने कहा कि चित्रकूट भगवान राम की तपोभूमि है यहाॅ रहकर के भगवान ने कोल-किरातों के साथ अपने जीवन का सामंजस्य किया। जिसके कारण वे राम राज्य की स्थापना में सफल हुये।

चित्रकूट ने भगवान राम को रामत्व प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यहाॅ के कण-कण में रामत्व का बोध होता है जो हमारी संस्कृति की आधार शिला है। डाॅ चन्द्रिका प्रसाद मिश्र चित्रकूट ने कहा कि मानस है नाना पुराण निगमागम संमत का आंकुचित स्वरूप जिसमें करण कार्य ब्रम्ह अनूप मानस की रचना अमित सुन्दर सहज स्वरूप, अक्षर अक्षर में रमा सियाराम का रूप। बताया कि मानस ज्ञान भक्ति कर्मयोग की त्रिवेणी है। इसीलिये इसे पंचम वेद कहा गया है। मानस का प्रारम्भ व से होता है और अंत में भी व होता है व वेद का विजाक्षर है मानस का नाद बिन्दु है। राम विश्व के कण-कण में विद्यमान है वे परमाणु से भी छोटे और आकाश में बडे हैं। मानस नौ की संख्या पर ही आधारित है। सांयकाल सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृखला में विशेष नारायण मिश्र, संगीताचार्य विकलाॅग विवि द्वारा शास्त्रीय संगीत के माध्यम से भजन प्रस्तुत किये गये। रात्रि में अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डाॅ देवकीनन्दन शर्मा वृन्दावन की रासलीला का मंचन हजारों दर्शकों ने मंत्र मुग्ध होकर लुत्फ उठाया। संचालन डाॅ करूणा शंकर द्विवेदी ने किया।

लोक कलाओं की प्रस्तुतियों से दर्शक हुये मंत्रमुग्ध
राष्ट्रीय रामायण मेले के मंच में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। दर्शकों ने तालियों की गडगडाहट से कलाकारों का मनोबल बढाया। महोबा के लखनलाल यादव की टीम व गन्धर्व कल्चर आर्गनाईजेशन लखनऊ द्वारा प्रस्तुतियां दी गई। तत्पश्चात झाॅसी की कु मंजरी प्रिया द्वारा कत्थक नृत्य प्रस्तुत किया गया। इसके बाद मथुरा की ख्यातिलब्ध रासलीला मण्डली ब्रजकला केन्द्र द्वारा भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का मनोहारी मंचन कर दर्शकों का दिल जीत लिया। इस अवसर पर बाॅदा-चित्रकूट सांसद भैरों प्रसाद मिश्र, जिलाध्यक्ष अशोक जाटव, पूर्व विधायक दिनेश प्रसाद मिश्र, एडवोकेट कु भालेन्दु सिंह, नगर पालिका परिषद चित्रकूटधाम कर्वी की पूर्व अध्यक्षा श्रीमती नीलम करवरिया, प्रदेश के पूर्व कबीना मंत्री जमुना प्रसाद बोस, हरिवंश पाण्डेय, मेले के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश करवरिया, राजा बाबू पाण्डेय, सुशील द्विवेदी, डाॅ घनश्याम अवस्थी, प्रद्युम्न दुबे लालू भईया, कलीमुद्दीन वेग, यूसुफ खाॅ, रामप्रकाश श्रीवास्तव प्रिन्स करवरिया, सोनू मिश्रा आदि उपस्थिति रहे।

प्राकृतिक खेती अपनाकर बढ़ायें उत्पादन: सांसद
बांदा-चित्रकूट सांसद भैरो प्रसाद मिश्र ने रामायण मेला परिसर सीतापुर में कृषि प्रदर्शनी एवं विराट किसान मेले का शुभारंभ फीता काटकर किया। 13 से 17 फरवरी तक पांच दिवसीय किसान मेला चलेगा।

सांसद भैरो प्रसाद मिश्र ने कहा कि किसान प्रदर्शनी एवं विराट मेले का उद्देश्य वैज्ञानिकों द्वारा जैविक खेती और प्राकृतिक खेती करने व विभिन्न विभागों के स्टालों को देखकर जागरूक हों। यहां से जाकर अन्य किसानों को जागरूक करने का काम करें। कहा कि वैज्ञानिकों के खेती के संबंध में बतायी गई जानकारी के अनुसार खेती करें तथा फसल को दोगुना बढ़ायें। अन्ना जानवरों को बांधना होगा तथा उनके गोबर एवं मल मूत्र खेतों में डालें। इस संबंध में कानून का डंडा न चलाना पड़े इसके पहले अपनी-अपनी गायों को बांध लें। किसान खेत की मिट्टी का परीक्षण करायें। गांव का पानी गांव में खेत का पानी खेत में। इसके बाद उन्होंने विभिन्न विभागों की लगाई गई प्रर्दशनियों का अवलोकन किया। जिलाधिकारी शिवाकान्त द्विवेदी ने कहा कि रामायण मेला के साथ-साथ कृषकों को जागरूक करना है जो अपने आजीविका के लिए वैज्ञानिको द्वारा बतायी गई विधियों को अपनायें।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती व जैविक खेती के बारे में विस्तार रूप से जनपद व गैर जनपद से आये वैज्ञानिक जानकारी देंगे। जिसके अनुसार खेती करें उर्वरक खादों का प्रयोग न करें। उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग कैंसर की बीमारी से पीड़ित आते है यहां के लोग ज्यादतर बीड़ी, तम्बाकू का इस्तेमाल करते हैं। यहां अन्ना नाम की संपदा है। इसको अभियान के रूप में अपनायें। अन्ना संपदा में बदल जायेगी। इस समस्या को दूर करने के लिए कमेटी का गठन किया गया है, परन्तु इसको और सक्रिय किया जायेगा।

About the Reporter

  • राजकुमार याज्ञिक

    चित्रकूट जनपद के ब्यूरो चीफ एवं भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के जिलाध्यक्ष राजकुमार याज्ञिक चित्रकूट जनपद के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। पत्रकारिता में स्नातक श्री याज्ञिक मुख्यतः सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं।, .



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