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मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग को मिलेगा ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार

शिक्षा स्तर को बेहतर बनाने और विद्यार्थी के भविष्य को एक नया अवसर प्रदान करने के उद्येश्य कार्य करने के लिए मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग को केन्द्र सरकार द्वारा नेशनल ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार प्रदान किया गया। एजुकेशन पोर्टल को इनोवेशन इन एक्जस्टिंग प्रोजेक्ट ऑफ गवर्मेंट डिपार्टमेंट केटेगरी में यह अवार्ड प्रदान किया गया है। अवार्ड की सूचना केन्द्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय की ओर से राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक लोकेश कुमार जाटव को दी गई है।

यह गोल्ड अवार्ड 26 और 27 फरवरी को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में 21वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस संगोष्ठी में दिया जायेगा। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अकादमिक एवं प्रशासनिक कार्यों के क्रियान्वयन की मॉनीटरिंग और परिणामों की समीक्षा के लिये एजुकेशन पोर्टल तैयार किया गया है। शिक्षा से सम्बन्धित विभागों, कार्यालयों, स्कूलों, शिक्षकों और पालकों के लिये बेहतर कार्य सम्पादन और ऑनलाइन सेवाएँ देने के मकसद से वर्ष 2008 में स्कूल शिक्षा विभाग ने नेशनल इनफार्मेशन सेंटर (एनआईसी) के सहयोग से एम.पी. एजुकेशन पोर्टल तैयार किया था। बदलते समय एवं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एजुकेशन पोर्टल में भी नवीन तकनीक का उपयोग कर इसे और अधिक उपयोगी बनाया गया है। एजुकेशन पोर्टल स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में एकीकृत ई-गवर्नेंस प्रणाली का कार्य बखूबी कर रहा है।

पोर्टल के माध्यम से प्रदेश की 90 हजार से अधिक बसाहटों के करीब एक करोड़ 50 लाख से अधिक बच्चों और एक लाख 50 हजार से अधिक सरकारी एवं प्रायवेट स्कूलों की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध है। पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के 3 लाख 90 हजार से अधिक शिक्षकों एवं अन्य अमले के वेतन, सर्विस-बुक एवं सेवा कार्यों का प्रभावी प्रबंधन किया जा रहा है। राज्य में एक करोड़ 50 लाख से अधिक स्कूल के विद्यार्थियों की व्यक्तिगत शैक्षिक एवं बैंक खातों की प्रमाणिक जानकारी का पूरा डाटाबेस भी पोर्टल के माध्यम से संधारित किया जा रहा है। विद्यार्थियों को मिलने वाली 9 विभागों की 35 से अधिक छात्रवृत्ति, शिष्यवृत्ति और प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्राप्त होने वाली 500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का लाभ भी समयपरक एवं पारदर्शी रूप से ऑनलाइन व्यवस्था के तहत वन क्लिक के माध्यम से विद्यार्थियों को मिल रहा है। देश में पहली बार जीआईएस एट स्कूल एप के माध्यम से एक लाख 25 हजार शालाओं में उपलब्ध अधोसंरचना के 13 लाख से अधिक जीईओ टैग फोटोज लिये गये हैं। इससे सभी बसाहटों में शाला संसाधनों की सुनिश्चितता में मदद प्राप्त हो रही है।

शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों की मान्यता भी इस पोर्टल के माध्यम से सरलीकृत एवं पारदर्शी रूप से ऑनलाइन प्रदान की जा रही है। इन स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिये आरक्षित 25 प्रतिशत सीट्स पर प्रवेश भी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन प्राप्त हो रहा है। एजुकेशन पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के लगभग एक लाख 50 हजार विद्यार्थियों का प्रतिभा मूल्यांकन कार्य कर उनकी स्कूलवार एवं शिक्षकों की ग्रेडिंग की गई है।

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