< सैनानी ने देह दान कर दिया इंसानियत का संदेश Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News जीते जी कर दिया था मेडिकल साइंस को अंग दान

सैनानी ने देह दान कर दिया इंसानियत का संदेश

जीते जी कर दिया था मेडिकल साइंस को अंग दान

दमोह के पूरन लाल अग्रवाल ने जीते जी न केवल देश की आज़ादी में अहम किरदार निभाया बल्कि देश की मेडिकल साइंस को निखारने अपने शरीर के सारे अंग दान दर दिए थे। सरकारी ख़ामी से इनके अंग तो किसी के काम न आ सके पर, मरने के बाद परिवार ने उनकी देह मेडिकल कॉलेज को दान की जिससे उनके शरीर से नई चिकित्सा पीढ़ी अपने इल्म में इज़ाफ़ा कर सके। आज देह को दान करते परिजन रो रो कर ग़मगीन थे तो लोंगो को इस बात की खुशी भी थी कि दकियानूसी सोच के बीच एक परिवार का मुखिया समाज को नई दिशा देकर दुनिया को अलविदा कह गया।

हर इंसान की तमन्ना होती है कि मरने के बाद उसके अंतिम संस्कार को विधि विधान और सामाजिक रीति से किया जाए, पर पूरन लाल जी अग्रवाल जैसे लोग विरले ही होते हैं जिन्होंने भूमिगत होकर ना केवल देश की आज़ादी में अहम किरदार निभाया बल्कि मरने के बाद भी चिकित्सकों की नई पीढ़ी को अपनी देह सौप दी ताकि उनके शरीर से वो कुछ नया सीखे जिससे चिकित्सकीय क्षेत्र में और अधिक सुधार आ सके। अपने जीते जी इन्होंने अपने देह को मेडिकल कॉलेज के नाम सात बरस पहले कर दिया था। परिवार के लोगो ने उनकी इच्छा को पूरा किया जो वाक़ई सीने पर पत्थर रखने जैसा है।

देहदानी पूरन लाल अग्रवाल के पुत्र शोभित अग्रवाल और परिवार के अन्य लोग अपने दिल पर पत्थर रखकर जबलपुर मेडिकल कालेज अपने पिता की देह लेकर गए और वहाँ पढ़ने वाले बच्चों के लिए दे आये। जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में 19 फरवरी 2011 में भरे गए संकल्प पत्र को पूरन लाल जी संभाल कर रखें रहे तथा अपने बेटों से कहते रहे कि जब भी मेरी मृत्यु तो मेरी देह ले जाकर मेडिकल कॉलेज में दान कर आना। कुछ दिन पूर्व पूरनलाल जी का स्वास्थ्य बिगड़ने पर परिजन जब उनका इलाज कराने जबलपुर के आदित्य हॉस्पिटल में ले गए तब उन्होंने उन्हें इस बात का स्मरण दिलाया कि मरने के बाद उनके शव को श्मशान घाट ले जाने की बजाए जबलपुर मेडिकल कॉलेज में दे आना।

गुरुवार सुबह पूरनलाल अग्रवाल ने दमोह में अंतिम सांसे ली। इसके बाद उनके बेटे ऋषि अग्रवाल सहित परिजनों ने उनकी 7 साल से लगातार जारी इच्छा को पूरा करते हुए भारी मन से उनकी देह को जबलपुर मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया। आज इस घर से एक बुजुर्ग का साया उठ गया लोग गमगीन है हर शक्श की आखों में गम के आंसू है, पर इन सब के बीच मानवीय संवेदनाओं को नई दिशा देता पूरन लाल जी का देह दान का संदेश प्रशंशा का नया सौपान माना जा रहा है।

आज का समाज मानव देह को अपनी धार्मिक रीतियों के बाद उसे पंच तत्त्वों में विलीन मानकर ही उसे अंतिम संस्कार का नाम देता है और ये भी हकीकत मानता है कि रूह निकलने के बाद ये काया किसी काम की नहीं होती, पर इस इंसान ने इन्सानियत के लिए देह दान कर ये संदेश दिया है कि ये मृत काया भी चिकित्सको को नई दिशा दे सकती है।

About the Reporter

अन्य खबर

चर्चित खबरें